Reply To: लीक से हटकर सोचने की ज़रूरत

#328

Deprecated: Function seems_utf8 is deprecated since version 6.9.0! Use wp_is_valid_utf8() instead. in /home/translat/public_html/wp-includes/functions.php on line 6131

Deprecated: Function seems_utf8 is deprecated since version 6.9.0! Use wp_is_valid_utf8() instead. in /home/translat/public_html/wp-includes/functions.php on line 6131
Suyash SuprabhSuyash Suprabh
Participant

आपने मशीनी अनुवाद के ख़तरों के बारे में जो कुछ लिखा है उससे मैं सहमत हूँ।

असहमति बस इस बात से है कि मशीनी अनुवाद की सीमाओं पर बात करने से हमें कुछ हासिल नहीं होगा।

भ्रामक प्रचार ने तो बड़े पद पर बैठे लोगों के दिमाग में यह बात डाल दी है कि भारतीय भाषाओं में क़ानून, शिक्षा आदि से जुड़े पाठ का आसानी से मशीनी अनुवाद किया जा सकता है। अगर हमारे प्रयासों से मशीनी अनुवाद की गुणवत्ता पर बहस शुरू होती है या लोग ग़लत अनुवाद से होने वाले नुक़सान के प्रति जागरूक बनते हैं, तो इसे हमारी सफलता के रूप में ही देखा जाएगा।

हर किसी के काम करने का अपना अलग तरीक़ा होता है। कोई लेख लिखकर अपनी बात रखता है तो कोई वीडियो बनाकर। इंटरनेट ने हमें आज कई मंच उपलब्ध कराए हैं, लेकिन क्या हम अपने फ़ायदे से जुड़े मसलों पर भी मुखर हो पाते हैं? इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि जो अनुवादक हर दिन न जाने कितने शब्दों की गहराई में जाते हैं वही तब मौन हो जाते हैं जब बात उनके हितों से जुड़ी होती है।

आपकी यह बात बहुत महत्वपूर्ण है कि हमें अपनी सामूहिकता की भूमिका और कार्यशैली को रेखांकित करना होगा। क्या आप इससे जुड़ी कोई सलाह दे सकते हैं?